कुंभ: एक डुबकी आस्था वाली – प्रयागराज

मानवता, पवित्रता और आस्था के सबसे बड़े पर्व कुंभ में आपको जोश और जुनून की अधिकता मिलेगी। यहाँ कुंभ (प्रयागराज ) के 45 कि•मी• के विशाल परिसर में पवित्र और मनमोहक हवा का बहाव होता रहता है।वैसे तो कुंभ को लोग धार्मिक महत्व ज्यादा देते हैं, लेकिन कुंभ का एक अपना सामाजिक और व्यावहारिक पहलू भी है। कुंभ मेले में जहाँ देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।

वहीं दूसरी तरफ प्रयागराज शहर भी दिल खोलकर उनका स्वागत करता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कुंभ की बढ़ती लोकप्रियता का ही असर है कि इस वर्ष 70 देश के लोग कुंभ में शामिल हो रहे हैं। व्यवस्था और सुविधाओं के लिहाज से भी कुंभ वर्ष दर वर्ष बेहतर हो रहा है।

कल्पना से अधिक ठंड के बावजूद भी लोग, सिर्फ यहाँ इकट्ठा होते हैं, बल्कि स्नान भी करते हैं। भक्तों की आस्था मौसम की मार भी सहकर अनवरत जारी रहती है। कुंभ मेले कि स्नान महास्नान होता है। कुंभ के स्मरण मात्र से पवित्रता छा जाती है, इसीलिए तो कुंभ को विश्व का सबसे बड़ा पर्व कहा जाता है। कुंभ में सभी का कल्याण और उद्धार निश्चित है।

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Pic – जोशी Kshama

लोग आस्था की पोटली लिए संगम की तरफ बढ़ने लगे, क्या बूढ़े और क्या जवान, सबका एक ही मकसद सिर्फ स्नान।
मध्य रात्रि से ही भक्त गण तैयार हो जाते हैं, साथ ही साथ प्रशासन भी हाईअलर्ट पर आ जाता है।
स्नान करना महज़ एक क्रिया नहीं है, इसका तात्पर्य अपनी सभी गलतियों को त्याग कर नई शुरुआत करना है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में आकर लोग अच्छी आदतों का संकल्प लेते हैं।

आस्था यहाँ आपको हर एक पहलू पर भारी पड़ती दिखेगी फिर चाहे वह कड़कड़ाती ठंड हो, या जेब तंग हो। भक्त सभी समस्याओं को किनारे छोड़ डुबकी लगाते हैं। पवित्र जल से स्नान उनके सभी सवालों का जवाब दे देता है।
गरीब हो या अमीर सभी का एक ही स्नान और एक स्थान है, इसीलिए कुंभ सबसे पूजनीय है। कुंभ का स्नान ऊर्जा का संचार करता है, यहाँ की पवित्रता शब्दों में नहीं, यहाँ की धारा में नज़र आती है।
इसीलिए आओ और नहाओ कुंभ में•••

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