उड़ीसा में चारों खाने चित होगी नवीन सरकार या फिर मोदी हो जाएंगे ढेर?

उड़ीसा की राजनीति हलचल !



उड़ीसा राज्य राजनीति का एक बड़ा अखाड़ा बनता दिख रहा है. राज्य में बीजू जनता दल का एकछत्र राज रहा है. लेकिन पिछले एक दो सालों में भारतीय जनता पार्टी ने इस किले में सेंध लगाने का काम किया है. जहां राज्य में हुये पंचायती चुनाव में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने का तमगा हासिल किया. वहीं कांग्रेस पार्टी को पीछे धकेल कर एक बड़ा संकेत दिया है.

अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद लोगों में बीजू जनता दल का एक विकल्प नजर आ रहा है. यह विकल्प भारतीय जनता पार्टी के रूप में हो सकता है. अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद लोगों में बीजू जनता दल का एक विकल्प नजर आ रहा है. यह विकल्प भारतीय जनता पार्टी के रूप में हो सकता है.




वही बात करें कांग्रेस पार्टी ने तो कांग्रेस कहीं ना कहीं यहां अपनी पकड़ ढीली करती दिख रही है. जहां पिछले कुछ चुनाव में उसने अंदरुनी स्तर पर बीजू जनता दल का समर्थन किया. वहीं पार्टी की आपसी फूट के कारण लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाए. इस बार भी कांग्रेस पार्टी रेस से बाहर नजर आ रही है.

ऐसे में सही लड़ाई पहले के साथी रहे बीजू जनता दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच होने वाली है. बीजू जनता दल की सबसे बड़ी मजबूती है उनका पिछले 20 सालों से एक छत्र राज करना. मुख्यमंत्री और पार्टी के सबसे बड़े नेता नवीन पटनायक ने लोगों में अपनी अच्छी छवि बना रखी है. लेकिन कहीं ना कहीं लोग भी अब विकल्प की तलाश में है. क्योंकि राज्य के कुछ बड़े मुद्दे जैसे किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी, सड़कों अस्पतालों जैसी सुविधाओं की कमी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा यह सब बड़ी बातें हैं. जिनके कारण लोग बीजू जनता दल का साथ छोड़ सकते हैं.




वहीं भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य चेहरे के रूप में उतार कर एक बड़ा दांव खेला है. भारतीय जनता पार्टी के पास स्थानीय बड़े नेता की कमी को धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले कुछ दिनों में पूरा कर दिया है. ऐसे में बीजेपी इस बार चुनाव के लिए लगभग तैयार नजर आ रही है, अब यह देखना दिलचस्प होगा आने वाले चुनाव में लोग किस तरफ जाते हैं.