दस फ़ीसदी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिली है. मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के 10 फ़ीसदी लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का फैसला लिया. जिसे लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिल रही है. इस आरक्षण बिल को पारित करने के लिए संसद में पारित 124वें संविधान संशोधन को चुनौती मिली है.
यूथ फॉर इक्वलिटी नामक एक संगठन ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है. इस याचिका में यह दावा किया जा रहा है कि यह संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है. ऐसे में मोदी सरकार के लिए यह एक समस्या का विषय हो सकता है.

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इस संगठन ने याचिका में कहा है कि इस मामले में जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए. इसके साथ ही इस पर रोक भी लगनी चाहिए. वहीं इसके पहले लोकसभा में भी तीन चौथाई बहुमत से यह बिल पास कर दिया गया. राज्यसभा में भी 165 मतों के साथ इस बिल को भरपूर समर्थन मिला. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने कहा कि हम सबका साथ और सबका विकास नीति के साथ यह बिल लेकर आए हैं. जिसमें गरीब सवर्ण परिवार को भी बेहतर जिंदगी मिलेगी. वहीं विपक्ष ने इस बिल का समर्थन तो किया लेकिन इसके प्रस्ताव को जल्दबाजी करार दिया. उनके अनुसार इस बिल को जल्दबाजी में पास किया जा रहा है. इस पर और विचार-विमर्श करने की जरूरत थी.

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